Indian Democracy Big Challenges Problems Issues Social Factors in Hindi

Indian Democracy: लोकतंत्र को प्रभावित करने वाले सामाजिक तत्व

भारत में लोकतंत्र की स्थापना हुए लगभग 71 वर्ष ( संविधान जसके द्वारा भारत में लोकतंत्र की स्थापना हुई सन 1950 में लागू हुआ था ) हो चुके हैं , परंतु व्यवहार में इसे उतनी सफलता नहीं मिली है जो इंग्लैंड ,अमेरिका तथा कुछ अन्य देशों में प्राप्त हुई है । इसका मुख्य कारण भारत की सामाजिक तथा आर्थिक परिस्थितियां हैं जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र को प्रभावित किया है । ये परिस्थितियां या तत्व इस प्रकार हैं –

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Indian Parliamentary System Problems Issues 6 Ways To Remove The Defects

Parliamentary System : संसदीय प्रणाली के दोषों को दूर करने के सुझाव

भारत में संसदीय प्रणाली को कार्य करते हुए अर्धशताब्दी से अधिक वर्ष हो चुके हैं ,परन्तु यहाँ पर यह प्रणाली इतनी अधिक सफल नहीं हुई जितनी कि इंग्लैंड में हुई हैं । इसका मुख्य कारण यह हैं कि इसमें अनेक त्रुटियां एवं दोष मैजूद हैं और कई बार तो भारत में इस प्रणाली की सफलता के बारे में शंकाएँ प्रकट की जाती हैं । इसके दोषों को दूर करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते है –

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Parliamentary System in India- Defects, Challenges, Problems

Parliamentary System: भारतीय संसदीय प्रणाली के 12 दोष

भारत में संसदीय लोकतंत्र की स्थापना की गई हैं । भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया हैं । प्रस्तावना में यह बात स्पष्ट रूप से कही गयी हैं कि सत्ता का अंतिम स्त्रोत जनता हैं और संविधान का निर्माण करने वाले तथा उसे अपने ऊपर लागू करने वाले भारत के लोग हैं । इसमें कोई शक नहीं है की भारतीय संसदीय प्रणाली की अनेकों विशेषताएं पाई जाती है परन्तु इसके कुछ दोष भी है जिसके कारण भारत में संसद प्रणाली उतनी सफल नहीं हो पाई जितनी इंग्लैंड में संसदीय प्रणाली सफल है। संसदीय प्रणाली के दोषों को आइये विस्तार से जानते है –

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Parliamentary System- Introduction and 11 Important Features

Parliamentary System : संसदीय प्रणाली की 11 विशेषताएं

संसदीय व्यवस्था -भारत में संसदीय लोकतंत्र की स्थापना की गई हैं । भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया हैं । प्रस्तावना में यह बात स्पष्ट रूप से कही गयी हैं कि सत्ता का अंतिम स्त्रोत जनता हैं और संविधान का निर्माण करने वाले तथा उसे अपने ऊपर लागू करने वाले भारत के लोग हैं । 11 Main Feature of Parliamentary System in India | संसदीय व्यवस्था – संसदीय प्रणाली की विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानते है –

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5 Important Reason For Adopt Indian Parliamentary System

Parliamentary System :संसदीय प्रणाली अपनाने के आवश्यक कारण

भारत में संसदीय लोकतंत्र की स्थापना की गई हैं । भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया हैं । प्रस्तावना में यह बात स्पष्ट रूप से कही गयी हैं कि सत्ता का अंतिम स्त्रोत जनता हैं और संविधान का निर्माण करने वाले तथा उसे अपने ऊपर लागू करने वाले भारत के लोग हैं ।
भारतीय संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा के सदस्यों में इस बात पर काफी वाद – विवाद हुआ था कि भारत में संसदीय शासन – प्रणाली अधिक ठीक रहेगी अथवा अध्यक्षात्मक Presidency शासन प्रणाली उचित रहेगी । अन्त में संसदीय शासन के पक्ष में निर्णय लिया गया । इसके लिए मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

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लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में अंतर ( Difference Between Public Administration and Private Administration in Hindi )

Public Administration : लोक और निजी प्रशासन में 12 अंतर

लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में आपसी भेदता और समानताओं के बारे में विद्वानों में मतभेद पाया जाता है। दूसरे शब्दों में सभी विद्वान ना तो इस बात से सहमत हैं कि यह दोनों प्रशासन एक दसरे से बिल्कुल पृथक है और ना ही इस बात के बारे में कि दोनों एक समान है, परंतु एक बात तो बड़े विश्वास से कही जा सकती है कि लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में कई पक्षों से समानताएं भी हैं और कई पक्षों से भिन्नताए भी पाई जाती है। लोक प्रशासन और निजी प्रशासन में अंतर का विस्तार सहित विवरण निम्नलिखित है-

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