Personnel Administration Scope- कार्मिक प्रशासन का क्षेत्र

Personnel Administration: कार्मिक प्रशासन का क्षेत्र

कार्मिक प्रशासन प्रणालीबद्ध है और विशिष्ट ज्ञान है। यह एक ऐसी तकनीक है जिससे कर्मचारियों द्वारा उत्कृष्ट कार्य प्रणाली की प्राप्ति में संगठन को सहायता मिलती है। इसके प्रमुख तत्व है नीति का निर्माण करना तथा उसे लागू करना ताकि निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति अधिकतम स्तर तक हो सके। कार्मिक प्रशासन का क्षेत्र इस प्रकार हैं –

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India-China relations from history to present भारत-चीन संबंध इतिहास से वर्तमान तक

India-China Relations : भारत-चीन संबंध इतिहास से वर्तमान तक

India-China भारत-चीन संबंध – भारत-चीन दोनों पड़ोसी एवं विश्व की दो उभरती शक्तियाँ हैं। दोनों देशों के बीच एक लम्बी सीमा रेखा हैं। भारत तथा चीन के आपसी सम्बन्धों का इतिहास बहुत ही पुराना हैं और दोनों देशों के बीच प्राचीनकाल से ही घनिष्ठ सांस्कृतिक सम्बन्ध रहे हैं। भारत से बौद्ध धर्म का प्रचार चीन की भूमि पर हुआ। चीन के लोगों ने प्राचीन काल से ही बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण करने के लिए भारत के विश्वविद्यालयों अर्थात नालंदा विश्वविद्यालय एवं तकशिला विश्वविद्यालय को चुना था क्योंकि उस काल में ये दो प्रमुख विश्वविद्यालय शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण थे। उस काल में यूरोप के लोग जंगली अवस्था में थे। भारत-चीन संबंध को विस्तार से आइये जानते हैं –

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Personnel Administration Meaning ,Definitions ,Nature in Hind-iकार्मिक -प्रशासन की परिभाषा-अर्थ-प्रकृति

Personnel Administration: कार्मिक प्रशासन की प्रकृति

कार्मिक प्रशासन दो शब्दों से मिलकर बना है। कार्मिक का अर्थ है -स्टाफ और प्रशासन का अर्थ है – संगठन अथवा कार्यलय या दफ्तर जहां स्टाफ मिलकर कार्य करते हैं । प्रशासन वह होता हैं जहां सरकार के कार्य किये जाते हैं अर्थात नीति निर्माण ,नियम लागू करना । विस्तार से जाने कार्मिक प्रसाशन की प्रकृति –

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India-SriLanka Relationship History ,in Hindi भारत-श्रीलंका सम्बन्ध

India-SriLanka Relations : भारत-श्रीलंका संबंध इतिहास से वर्तमान तक

भारत तथा श्रीलंका के आपसी सम्बन्ध लगभग 2000 वर्षों से भी अधिक पुराने हैं। भारत और श्रीलंका दोनों ही इंग्लैंड के अधीन थे। भारत ने 1947 में तथा श्रीलंका ने 1948 में अंग्रेजों से स्वतंत्रता प्राप्त की। दोनों देशों में लोकतंत्र की स्थापना की गई और दोनों ने ही गुट-निरपेक्षता की नीति का अनुसरण किया, परंतु 1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया तो श्रीलंका ने भारत की सहायता नहीं की जिससे भारतीयों की भावनाओं को ठेस लगी। इस अध्याय में हम आज भारत और श्रीलंका के सम्बन्धो के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे । भारत के श्रीलंका के साथ सम्बन्धो का वर्णन इस प्रकार हैं –

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India-Nepal Relationship History to Present in Hindi नेपाल-भारत में सम्बन्ध -भारत-नेपाल सम्बन्ध वर्तमान स्थिति

India-Nepal Relations: भारत-नेपाल संबंध इतिहास से वर्तमान तक

India-Nepal Relationship नेपाल तथा भारत में सम्बन्ध -भारत के निकट निकटतम पड़ोसी देश नेपाल श्रीलंका चीन बांग्लादेश तथा पाकिस्तान आदि है। भारत के इन देशों के साथ बहुत से सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक तथा राजनीतिक संबंध रहे हैं। इस अध्याय में हम भारत के नेपाल के साथ संबंधों का अध्ययन करेंगे । नेपाल तथा भारत के सम्बन्धो का इतिहास 1950 से 2005 तक –

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Personnel Administration Features Characteristics Objectives In Hindi - कार्मिक प्रशासन

Personnel Administration : कार्मिक प्रशासन विशेषताएँ | उदेश्य

कार्मिक प्रशासन ,प्रशासन का वह अंग है जिसका संबंध कार्य कर रहे व्यक्तियों और संगठन में उनके संबंधों के साथ है। इसका अभिप्राय मानव संसाधनों के संपूर्ण सांगठनिक अंर्तसंबंधों से है ,जो की भर्ती की गतिविधि से लेकर सेवा मुक्ति की प्रक्रिया तक चलते हैं। इसके अंतर्गत कार्मिक नियोजन व पूर्वानुमान, मानवीय कार्यकुशलता का समीक्षण , भर्ती व चयन, प्रशिक्षण विकास तथा कार्यकुशलता के उत्पादन को बनाए रखना व उसमें सुधार करना सम्मिलित है । कार्मिक प्रशासन के प्रमुख उद्देश्य या लक्ष्य और विशेषताएं इस प्रकार है –

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Future of Democracy in India भारतीय लोकतंत्र का भविष्य

Future of Democracy in India भारतीय लोकतंत्र का भविष्य

भारतीय लोकतंत्र का भविष्य – भारत में लोकतंत्र की स्थापना हुए अर्धशताब्दी से अधिक समय बीत चुका है और इसकी सफलता के बारे में विद्वानों में मतभेद पाया जाता है। कई विद्वानों द्वारा यह विचार पेश किया गया है कि भारतीय राजनीति में कुछ ऐसी समस्याएं हैं जो इसकी जड़ों को खोखला करती जा रही है। भारत में गरीबी ,अनपढ़ता, जातिवाद,क्षेत्रवाद ,साप्रदायिकता तथा अन्य कुछ ऐसी समस्या है जो लोकतंत्र की सफलता के मार्ग में बड़ी बाधाएं बनी हुई है। यह कहा जाता है कि यदि शीघ्र ही इन समस्याओं का कोई हल नहीं निकाला गया तो भारत में लोकतंत्र का भविष्य और अधिक धुंधला हो जाएगा परंतु वास्तविकता इससे अलग है और देश में लोकतंत्र का भविष्य उज्जवल है। भारत में लोकतंत्र का भविष्य उज्जल है हम इस आधार पर कह सकते हैं –

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Factors Which Strengthen Democratic System in India भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने वाले तत्व

Democratic System: लोकतंत्र को मजबूत करने वाले तत्व

भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने वाले तत्व – भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राज्य है जिसमें लोकतंत्र की स्थापना हुए अर्धशताब्दी से अधिक वर्ष हो चुके हैं। यद्यपि भारत में अनेक ऐसे तत्व मौजूद है जो लोकतंत्र में की संचालन तथा इसकी सफलता के मार्ग में बाधा बने हुए हैं परंतु भारत में कई संवैधानिक तथा गैर संवैधानिक तत्व तथा परंपराएं भी विकसित हुई है जो लोकतंत्र को दृढ़ता प्रदान करती है। भारतीय लोकतंत्र को जिन लोकतंत्रीय परंपराओं ने शक्तिशाली बनाने में योगदान दिया है उनका वर्णन निम्नलिखित हैं –

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Indian Democracy -Challenges and Problems भारतीय लोकतंत्र की समस्यांए और चुनौतियां

Indian Democracy: भारतीय लोकतंत्र की समस्यांए- चुनौतियां

Indian Democracy : 25 Challenges and Problems भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियां – भारत में संविधान द्वारा लोकतांत्रिक शासन- प्रणाली की व्यवस्था की गई है। संविधान के प्रस्तावना में भारत को एक प्रभुसत्ता- संपन्न, समाजवादी ,धर्म-निरपेक्ष लोकतंत्रीय गणराज्य घोषित किया गया है। प्रस्तावना में यह भी कहा गया है कि संविधान का उद्देश्य भारत के सभी नागरिकों को सामाजिक ,आर्थिक और राजनीतिक न्याय दिलाना ,विचार ,अभिव्यक्ति, विश्वास,धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रदान करना ,प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता की प्राप्ति कराना है। भारतीय लोकतंत्र की कार्यशीलता में हमारे सामने कुछ ऐसी समस्याएं तथा दोष आए हैं जिनके कारण भारत में लोकतंत्र पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया है । इनका वर्णन इस प्रकार हैं –

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Indian Democracy 5 Major Economic Factors Challenges Inequality -भारतीय लोकतंत्र को प्रभावित करने वाले आर्थिक तत्व

Democracy: लोकतंत्र को प्रभावित करने वाले आर्थिक तत्व ,चुनौतियां

भारत में लोकतंत्र की स्थापना हुए लगभग 71 वर्ष ( संविधान जसके द्वारा भारत में लोकतंत्र की स्थापना हुई सन 1950 में लागू हुआ था ) हो चुके हैं , परंतु व्यवहार में इसे उतनी सफलता नहीं मिली है जो इंग्लैंड ,अमेरिका तथा कुछ अन्य देशों में प्राप्त हुई है । इसका मुख्य कारण भारत की सामाजिक तथा आर्थिक परिस्थितियां हैं जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र को प्रभावित किया है । ये परिस्थितियां या तत्व इस प्रकार हैं –

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